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Saturday, 12 August 2023

आमुक्ति का करिश्मा: सीमा ही क्यों?: भाग ३

 


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आखो में थोड़ी सी आशा की चमक लिए उर्मिला और नागनाथ ने पूछा, “बताओ किरण! क्या करना होगा?”

फिर किरण ने कुछ पूजा का सामान इकठ्ठा किया| घर में खीर पकाने के लिए कहा|

रेत का शिवलिंग स्थापित कर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हुए हवन किया|

हवन की खुशबु सूंघ कर, मंत्रोच्चारण की आवाज सुन कर, सीमा हवन की तरफ खिची चली आई| हवन के पास आकर आहूतिया देने लगी| फिर उसने शिव पूजन कर अत्यंत मधुर स्वरों में शिव तांडव स्त्रोत्र भी गाया| उसके मुख से शिव तांडव स्त्रोत्र सुन उर्मिला और नागनाथ अचम्भे में पड़ गए क्यों की सीमा को संस्कृत नहीं आती थी|


लेखिका: रिंकू ताई

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आमुक्ति का करिश्मा: सीमा ही क्यों?: भाग २


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ये सुन, सीमा थोड़ी देर के लिए बिलकुल चुप हो गयी|

थोड़ी देर के बाद, वो फिर से जोर से सासे लेने लगी, उसकी आखे गोल घुमने लगी, दांत भींचने लगे और वो फिर से बेहोश हो गयी| किरण ये देखकर विचलित हो गयी| पर उसने हिम्मत नहीं हारी|

वो उर्मिला और नागनाथ के पास गयी और उसने कहा, “ये बात पक्की हैं की वो पिशाचिनी केवल अपनी बात कहना चाहती हैं| नहीं तो अबतक सीमा को आढाटेढ़ा कर कई बार उसने पटक दिया होता| पर समस्या ये हैं की, उसकी बात कोई नहीं समझ सकता; क्यों की वो मल्यालम में बोल रही हैं| हम में से किसी को भी मल्यालम नहीं आती| तो हमें ही उपाय करना पड़ेगा|”

लेखिका: रिंकू ताई

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आमुक्ति का करिश्मा: सीमा ही क्यों?: भाग १


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उर्मिला और नागनाथ को शांत कर, किरण सीमा के पास गयी| उसने सीमा के चेहरे को ध्यान से देखा| किरण को उस चेहरे में एक ऐसी पीड़ा नजर आ रही थी, जो किसी माँ के चेहरे पर होती हैं, अपने बच्चे को खोने के बाद|

किरण ने गरुड़ पुराण से कुछ मन्त्र पढ़े और सीमा को शांत होने के लिए कहा| सीमा सुबकते हुए चुपचाप बैठी रही|

फिर किरण ने पूछा, “कौन हो तुम?”

सीमा ने मल्यालम में कहा, “എന്റെ പേര് അമുക്തി

किरण को मल्यालम नहीं समझ रही थी|

तब किरण ने थोडा जोर देकर कहा, “मैं जानती हु, तुम्हे मेरी बोली बात समझ रही हैं| मैं कोई तुम्हारी दुश्मन नहीं हु| ये भी जानती हु की, तुम कुछ कहना चाहती हो| पर क्या? ये मैं नहीं समझ सकती क्यों की तुम मल्यालम में कह रही हो| मुझे मल्यालम नहीं आती| इसीलिए हिंदी में कहो| तभी मैं कुछ कर सकुंगी|”


लेखिका: रिंकू ताई

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आमुक्ति का करिश्मा: करिश्मा: भाग ७

 

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बस इतना कह कर, नागनाथ जोर-जोर से रोने लगा| थोड़ी देर रोकर अपना दुःख जताते हुए उसने कहा, “मेरी बेटी ने कभी किसी से नफ़रत नहीं की| वो हर किसी से दोस्ती करती थी| पर आज देखो उसके साथ क्या हो गया हैं? जब वो ठीक थी तब उसके साथ करिश्मा थी| पर वो अब फ़ोन भी नहीं उठा रही| मेरी बेटी ने किसीका कभी बुरा नहीं चाहा| पर उसके साथ ये कैसे हो गया? भगवान भी उसकी परीक्षा क्यों ले रहे हैं? अगर उस पिशाचिनी को किसीके जरिये अपनी बात रखनी ही थी, तो उसने मेरी बेटी को ही क्यों चुना? उसने उस करिश्मा के जरिये अपनी बात क्यों नहीं कही?”

कई सवालों के साथ उर्मिला भी रोने लगी| किरण दोनों की हालत देखकर कुछ सोचने लगी थी|


लेखिका: रिंकू ताई

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आमुक्ति का करिश्मा: करिश्मा: भाग ६

 



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अपना रोना रोकते हुए, आगे नागनाथ ने कहा, “फिर मैंने सीमा के फ़ोन से उसने बुक किये हुए होटल में पूछा की, सीमा के साथ कौन-कौन था? तो होटल वालों ने कहा की करिश्मा थी| होटल वालों ने यह भी बताया की करिश्मा अक्सर महीने में एकाध बार एर्नाद आती थी| करिश्मा हमेशा एक ही ड्राईवर को अपने साथ ले जाती थी| उसका नाम असलम बताया गया मुझे| कभी वो अकेले आती थी, तो कभी उसके साथ उसकी कोई सहेली रहती थी| ऐसा होटल वालो ने ही मुझे बताया|”

परेशान नागनाथ ने आगे कहा, “फिर मैंने असलम से करिश्मा के बारे में पूछा| तो उसने बताया की, करिश्मा अक्सर एक मजार पर चादर चढाने एर्नाद आती थी| उस दिन भी करिश्मा और सीमा उसी मजार पर गयी थी और उसके बाद होटल लौट आई|” 


लेखिका: रिंकू ताई

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आमुक्ति का करिश्मा: करिश्मा: भाग ५


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आगे नागनाथ ने कहा, “सीमा की दिमागी हालत का सर्टिफिकेट लेकर, मैं सीमा की छुट्टी के लिए उसके बैंक गया था| वहा भी मैंने हर एक से करिश्मा के बारे में पूछा, की वो कहा हैं? तो बैंक के सहकर्मियों ने बताया की, वे लोग किसी करिश्मा को जानते हि नहीं|”

अपने मन में उठ रहे सवालों को बड़ी मुश्किल से रोकते हुए आगे नागनाथ ने कहा, “बैंक वालों ने सीमा को छुट्टी दे दी और फिर उसके क्वार्टर पर भी मुझे ले जाया गया| जहा से मैंने सीमा का सारा सामान ला लिया| वहा भी मैंने आसपास करिश्मा के बारे में पूछताछ की पर किसी को कुछ नहीं पता| वो लड़की कहा से आई? कौन थी? कहा गयी? कोई कुछ नहीं जनता|”


लेखिका: रिंकू ताई

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आमुक्ति का करिश्मा: करिश्मा: भाग ४

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किरण ने आगे पूछा, “उसके साथ कौन था पुरे दिन? और आखरी बार बात हुई तब कौन था उसके साथ?”

उर्मिला ने बताया, “करिश्मा, उसकी नयी सहेली, दोनों साथ गयी थी एर्नाद घुमने| उसी ने सीमा को अस्पताल में भर्ती किया और हमें जल्दी वहा थिरुवनंतपुरम पोहोचने के लिए कहा|”

किरण ने पूछा, “करिश्मा के साथ कुछ बात हुई उस दिन के बारे में, उस मजार के बारे में?”

इतनी देर अपनी परशानी को छिपा कर बैठे नागनाथ ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा, “नहीं किरण, वो लड़की थोड़ी अजीब लगी| उसने सीमा को थिरुवनंतपुरम के बड़े अस्पताल में भर्ती किया और वो हम लोगों के पोहोचने का ही रास्ता देख रही थी| भले ही वो खुद सीमा को एर्नाद से वहा तक अम्ब्युलेंस में ले आई पर उसने एक भी रूपया नहीं माँगा| उसने अस्पताल के पुरे पेपर्स दिए और वो ऐसे गयी जैसे गायब हो गयी हो|”


लेखिका: रिंकू ताई

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