अकड़
और अभिमान एक मानसिक बीमारी है, जिसका इलाज कुदरत ओर समय जरूर करता है।।
कुछ बातों का इलाज समय आने पर कुदरत करती ही हैं उनमे से एक हैं अकड़ और दुरसा हैं हद से ज्यादा अभिमान|
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धीरज
अपने लिए,
प्रेम
दूसरों के लिए,
और
करुणा सभी के लिए!!
अगर आपके अन्दर धीरज - धैर्य न हो तो आप हमेशा जल्दबाजी में ही रहेंगे| जल्दबाजी में आप हर बार प्रेम से बर्ताव करोगे ये जरुरी तो नहीं हैं| और जब प्रेम के बिज ही अंकुरित न हुए तो करुना का झरना नहीं बहेगा| इसीलिए अपने अंतर्मन में हमेशा धैर्य को स्थापित करके रखे|
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समझदारी
की बातें सिर्फ़ दो ही लोग करते हैं।।
एक
वो जिसकी उम्र और तर्जुबा दोनों अधिक हो।।
दूसरा
वो जिसने बहुत कम उम्र में, अच्छा और बुरा दोनो वक़्त देखा
हो।।
बढती उम्र के साथ कई बार समझदारी नहीं आती क्यों की उस व्यक्ति ने अच्छे समय में भी केवल बुराई को ही ढूंढा रहता हैं| जो बुरे समय में भी कुछ सक्रत्मकता को पा लेता हैं वो अक्सर समझदार हो जाता हैं|
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बदल
देते है लोग कर्म से ही दुनिया, तकदीर पर भरोसा कुछ ज्यादा न करो
!!
तक़दीर आपकी नियत से ही बनती हैं| और नियत ही इंसान के कर्म का रास्ता तय करती हैं| अगर कर्म अच्छे हैं तो फिर तक़दीर भी बदलती हैं और दुनिया भी|
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जिनकी
भाषा में सभ्यता होती है
उनके
जीवन में सदैव भव्यता होती है
अतिशय उत्तम विचार हैं| जो लोग कम से कम सभ्य शब्दों में अपनी बात रखते हैं और जीवन को सरल रखते हैं, वे लोग हमेशा ही अपने बर्ताव से सबका मन जित लेते हैं| फिर उनकी हर बात भव्य बन ही जाती हैं|
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अनुपयोगिता
से लोहा जंग खा जाता है, स्थिरता से पानी अपनी शुद्धता खो
देता है इसी तरह निष्क्रियता मस्तिष्क की ताकत सोख लेती है निरंतर सक्रिय रहें
जीवन में।
वो कहते हैं न खाली दिमाग शैतान का घर होता हैं| और शैतान हमारी उर्जा को नष्ट कर देता हैं| इसीलिए हमेशा कुशल कर्म करते रहने की कोशिश करिए|
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मित्रता
एवं रिश्तेदारी सम्मान की नही भाव की भूखी होती है बशर्तें लगाव दिल से होना चाहिए
दिमाग से नही|
भावना नहीं रही तो सम्मान भी नहीं आता किसी के प्रति| इसीलिए जहा भावनाए जुड़ जाती हैं वहा हमेशा मित्रता एवं रिश्तेदारी बनी रहती हैं| लगाव दिल से रहा तो भावनाए जिवंत रहती हैं वर्ना स्वार्थ से जुड़े रिश्ते दिमाग में ही घर करते हैं और वही पर खत्म हो जाते हैं|
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जो
आपके हैं,
वो
आपको देखकर व्यस्त नही हो सकते!
और
जो आपको देखकर व्यस्त हो जायें, वो आपके नही हो सकते!!
आजके ज़माने में हर कोई व्यस्त होता हैं| पर जो आपके लिए अपनी व्यस्तता से दो पल भी निकाल लेता हैं न वो सही मायने में आपकी कद्र करता हैं ये बात आप जितनी जल्दी समझ लेंगे उतनी जल्दी अपनों को परायों के बिच ढूंढ निकालोगे|
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आप
शब्द कितनी भी समझदारी से इस्तेमाल कीजिए फिर भी सुनने वाला अपने मन की स्तिथि और
अपने विचारों के अनुसार ही उसका मतलब निकालता है|
पर इसका मतलब ये भी नहीं हैं की आप नासमझी भरी बाते करे| कम बोलो पर शब्दों को सही मायनों में पिरो कर बोलो तो सुनने वाले की मनस्थिति भी बदल ज्यादा हैं|
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ताक़त
और पैसा ज़िन्दगी के फल हैं
परिवार
और मित्र जिन्दगी की जड़ हैं
हम
फल के बिना अपने आप को चला सकते हैं
पर
जड़ के बिना खड़े नहीं हो सकते!
हा हमारा परिवार, हमारे मित्रगन हि हमारे जीवन को आनंदित करते हैं और जीवन प्रफुल्लित हो उठता हैं| अगर जीवन में आनंद चाहिए तो परिवार और मित्र जरुरी हैं|
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दौलत
सिर्फ रहन सहन का स्तर बदल सकती है बुद्धि,नियत और
तक़दीर नही।
ये अगर झूठ होता तो आज अमेरिका के लोग जो की दुनिया का सबसे धनी देश हैं अवसाद से ग्रसित न होते| अगर तक़दीर में तकलीफे लिखी हैं तो किसी न किसी रूप में वो आएगी और आपका धन भी आपको उन तकलीफों से मुक्ति नही दे सकेगा| आपकी तक़दीर, आपका भविष्य आपकी नियत तय करती हैं| अगर नियत ही ख़राब होगी तो फिर कभी न कभी वो सबकुछ आपके साथ भी होगा जो कह्राब नियत के चलते आपने दूसरों के साथ किया हैं| और आपकी सोच, आपकी बुद्धि तय करेंगी की आपकी नियत कैसी होगी| रावण को भी उसकी दुर्बुद्धि के कारण ही पराजय का मुख देखना पड़ा जबकि उसकी लंका नगरी सोने की थी| इसीलिए ये समझ लो की तक़दीर, नियत और बुद्धि अगर अच्छे हैं तो गरीबी भी सुख की सरगम बजायेंगी और ये अगर निम्न स्तर के हैं तो दौलत भी काटे ही चुभोयेंगी|
प्रेम, सम्मान
और अपमान ये एक निवेश की तरह हैं जितना हम
दूसरो को देते है, वो हमें जरूर ब्याज सहित वापस मिलता है
हा हमारा बर्ताव एक निवेश की तरह ही तो हैं| अगर हम प्रेम और सम्मान से सबके साथ बर्ताव करेंगे तो हमें भी प्रेम और सम्मान मिलेगा और अगर हम दूसरों को अपमानित करने में ही धन्यता मानेगे तो एक न एक दिन हमारा पतन निश्चित जरुर होगा|
सार्वजनिक
रूप से की गई आलोचना अपमान में बदल जाती है और एकांत
में बताने पर सलाह बन
जाती है|
यह आज के परिवेश में हर माता पिता को ध्यान में रखने योग्य बात हैं| अगर आप सबके सामने आपके बच्चे को खुलेआम उसकी आलोचना करते हुए उसका अपमान करते रहेंगे तो वो आपपर कभी विश्वास नहीं रखेगा और अपनी परेशानियों में हो सकता हैं की वो गलत संगत में चले जाये| क्यों की आपने उसकी आलोचना सबके सामने की जो उसके आत्मसम्मान को ठेस पोहोचाती हैं| इसीलिए जरुरी हैं की आप आपके बच्चे की आलोचना एकांत में ही करे|
खुशी
से संतुष्टि मिलती है। और संतुष्टि से खुशी मिलती है। परन्तु फर्क बहुत बड़ा है। खुशी
थोड़े समय के लिए संतुष्टि देती है, और संतुष्टि हमेशा के लिए खुशी
देती है।
संतुष्ट रहना ये अपने आप में एक साधना से कम नहीं हैं| अगर आप संतुष्ट रहना ही नहीं जानते तो आपको हमेशा पलभर की ही नाशवान ख़ुशी मिलेगी| और ख़ुशी को पाने के हठ में जीवन और भी दुखद होता जायेगा| इसीलिए संतुष्ट होना सीखिए यही सुखी जीवन का सार हैं|
आपका
सम्मान उन शब्दों में नहीं है, जो आपके सामने कहे गए, बल्कि उन
शब्दों में है,
जो
आपकी अनुपस्थिति में आपके लिए कहे जाते है।
जिंदगी में मुहपर हर कोई आपको अच्छा ही कहेगा| पर जैसे ही आपने मुह फेर लिया आपकी बुराई के किस्से रचे जायेंगे और कहे जायेंगे| कुछ ही लोग होते हैं जिनके बारे में पीठ पीछे अच्छी बाते होती हैं| ऐसे लोग भी अलग ही होते हैं| वो कभी किसी की बुराई उसके पीठ पीछे नहीं करते| वैसे तो हर सोशल मिडिया प्लेटफार्म का कमेंट सेक्शन आज की तारीख में बुरे कमेंट्स से भरा पड़ा हैं|
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जय श्री राम!
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दिन की शुरुआत सुविचार पढ़कर करो तो दिन सवर जाता हैं| लीजिये आपके लिए कुछ सुविचार!
भुलाया उनको जाता हैं जो दिमाग़ में बसते हैं,
दिल में बसने वालों को भूलना नामुमकिन हैं
हा जो दिल में बसते हैं उनको कभी नहीं भूलता हैं ये मन| और जो दिमाग में घर कर जाते हैं उनसे कोई भावना नहीं जुडी होती हैं| जुडा होता हैं तो केवल स्वार्थ| स्वार्थ की पूर्ति के बाद अक्सर हम उनको भुला देते हैं जिनकी जगह केवल दिमाग में होती हैं|
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पैर को लगने वाली चोट संभल कर चलना सिखाती है
और मन को लगने वाली चोट समझदारी से जीना सिखाती है।
संभल कर चलना हमारी जिम्मेदारी हैं क्युकी पैर भी तो हमारा हि हैं और चोट भी हमें ही तकलीफ देती हैं| चोट लगने के बाद भी जो संभलकर नहीं चलता वो अक्सर किसी न किसी नशे में होता हैं| फिर नशा चाहे किसी नशीली चीज का हो या घमंड का - दोनों संभलने नहीं देते|
किसी से भावनाए जुड़ जाती हैं| पर हम नासमझी में ये भूल जाते हैं की सामने वाले के मन में हमारे लिए कोई भावना होगी ही ये जरुरी नहीं और उसी नासमझी में खुद की भावनाओं का अपमान कर बैठते हैं| दिल टुटा तो तकलीफ होती हैं पर असली हिम्मत तो इसमें हैं की हम उस चोट से कुछ सीखे और समझदारी से अपना जीवन जिए| दिल पर लगी चोट अक्सर अवसाद का रूप ले लेती हैं| पर समझदारी इसी में हैं की अवसाद के बंद कोठरी के बाहर निकला जाए और मन को अपने आराध्य के समर्पण में लगा दिया जाए| मन ही मन अपने ईश्वर से प्रार्थनाये की जाए तो बुरे से बुरे परिस्थिति से मुक्ति अवश्य मिलती हैं|
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हाथ
बांधे क्यों खड़े हो हादसों के सामने।
हादसे
कुछ भी नहीं है होंसलों के सामने।।
जीवन हैं तो हादसे होते रहेंगे| अपने बिछड़ते रहेंगे| पर उन हादसों से मन को उद्विग्न कर निराशा में डूबना बिलकुल ही गलत बात हैं| हिम्मत और हौसला रखेंगे तो कितना भी नुकसानदेह हादसा हो हम उससे उभरकर अपने जीवन को सुखमय बनाने के लिए उचित उपाय जरुर कर सकेंगे|
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मुस्कुराहटें
भी उन्ही की मुरीद होती हैं
जो
ज़ख़्म सह के भी हँसना नही भूलते
हा सच ही तो कहा हैं| अगर हम जख्म के ही बारे में सोचते रहेंगे तो रोते रहेंगे और जख्म हमेशा हरा ही रहेगा| जरुरी हैं उस दर्द को अपना लेना - मुस्कुराकर| जैसे ही हमने मुस्कान दी सारे शरीर में एक सकारात्मकता दौड़ जाती हैं| इसीलिए जख्म हैं तो भी उसे प्यार से अपना लीजिये तकलीफे दूर होगी|
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सारी
उमर अच्छा करके भी,
एक
दिन की गलती बुरा बना देती है !!
दुनिया का दस्तूर हैं, गलतियों के बारे में बहस करे| ये भी सच हैं की जीवनभर आपने कुशल कर्म किये पर एक गलती से किया हुआ गलत काम आपको दुनिया के नजर में गलत बना देता हैं| पर ये भी उतना ही जरुरी हैं की हम उस गलती का पछतावा किस तरह से करते हैं - रोकर उसके लिए खुद को कोस कर या हसकर उस गलती को न दोहराने की कसम खा कर| अगर हम हमारी गलती पर रोते रहे तो दुनिया आसुओ का तमाशा बना देंगी और अगर हम हमारी गलती से सबक लेकर उसे फिर से न दोहराने का प्राण ले ले तो दुनिया भी उस गलती तो देर सवेर भूल जाती हैं|
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आप यह
नहीं कह सकते कि आपके पास समय नहीं है क्योंकि आपको भी दिन में उतना ही समय (24 घंटे)
मिलता है जितना समय महान एंव सफल लोगों को मिलता है|
6)
जो
आप पर भरोसा करता है उस से कभी झूठ मत
बोलो।।
और
जो आप से झूठ बोलता है उस पर कभी भरोसा मत करो ।।
7)
अगर
आप सब के प्रिय बनना चाहते है तो जो आप से प्यार करते है उनसे कभी झूठ मत बोलो, कभी
गुमराह मत करो,
क्यो
की आज आपको शायद कुछ फायदा हो जाये, लेकिन कालांतर के लिए आप खुद के
पैर में कुल्हाड़ी मार लेगे।।
8)
समाज
मे घर मे परिवार में सम्मान चाहते है तो बहुत जरूरी है कि आप बहुत सरल और सत्य
बोले,
सब
का भरोसा आप के प्रति रहना चाहिए, जितना भरोसा बढ़ेगा उतनी आप की
प्रगति होगी।।
9)
आप
किसी भी कार्य क्षेत्र में है सब का भरोसेमंद रहिये, आप की
सच्चाई आप को प्रगति और आनंद देगी।।
10)
जो
आप से झूठ बोल रहा है उससे सावधान रहे, आज आप के सामने
झूठ बोल रहा है तो कल आप के लिए भी किसी से झूठ बोल सकता है,जो आप की
छवि को धूमिल कर सकती है।।
सुविचार पढ़ने से मन को शांति भी मिलती है और समस्या का समाधान भी मिलता हैं तथा कुशल कर्म करने की उत्तम उर्जा मिलती हैं इसी लिए आपके लिए लाये हैं 10 सुविचार!
1)
परखो
तो कोई अपना नही समझो तो कोई पराया नहीं
2)
कभी
न भूलें हमारी उपलब्धियों में दूसरों का भी योगदान होता है क्योंकि
समन्दर
में भले ही पानी अपार है पर सच तो यही है कि वो नदियों का उधार होता है !!
3)
जिनकी
संगत मैं ख़ामोश संवाद होते है,
अक्सर
वो रिश्ते बहुत ही ख़ास होते हैं!!
4)
लोग
बुरे नहीं होते बस जब आपके मतलब के नहीं होते तो बुरे लगने लगते है॥
5)
मुझे
आजमाने वाले शख्स तेरा शुक्रिया,
मेरी
काबिलियत निखरी है तेरी हर आजमाइश के बाद !!
6)
कभी
कभी धागे ही बड़े कमज़ोर चुन लेते है हम!
और
फिर पूरी उम्र गाँठ बाँधने में ही निकल जाती है!!
7)
स्वीकार
करने की हिम्मत और सुधार करने की नीयत हो तो
सुविचार पढ़ने से मन को शांति भी मिलती है और समस्या का समाधान भी मिलता हैं तथा कुशल कर्म करने की उत्तम उर्जा मिलती हैं इसी लिए आपके लिए लाये हैं 10 सुविचार!
1)
ये
दुनिया अक्सर उन्हें सस्ते में लूट लेती है,
जिन्हें
खुद की कीमत का अंदाज़ा नहीं होता
2)
जरा सी
जिन्दगी में,
व्यवधान
बहुत हैं,
तमाशा
देखने को यहाँ,
इन्सान
बहुत हैं
खुद ही
बनाते हैं हम,
पेचीदा
जिंदगी को,
वर्ना तो
जीने के नुस्खे,
आसान
बहुत हैं
3)
जमाने
में उसने बड़ी बात कर ली
खुद अपने
से जिसने मुलाकात कर ली
4)
दौलत
की भूख ऐसी लगी कि कमाने निकल गए!
जब
दौलत मिली तो हाथ से रिश्ते निकल गए!
बच्चों
के साथ रहने की फुरसत ना मिल सकी!
फुरसत
मिली तो बच्चे कमाने निकल गए!
वाह
री जिंदगी
5)
समझनी
है जिंदगी तो पीछे देखो,
जीनी
है जिंदगी तो आगे देखो
6)
गुज़रते
दिनों का नही,
बल्कि
यादगार लम्हों का नाम है, जिंदगी
7)
साजिशें
वो रचते हैं दुनिया में जिन्हें कोई जंग जीतनी हो,
मेरी
कोशिश तो दिल जीतने की होती है ताकि रिश्ता कायम रहे जब तक जिंदगी हो
8)
जरूरी
नही कि जिसमें साँसे नहीं वही मुर्दा हैं
जिसमें
इन्सानियत नहीं हैं वो कौन सा जिन्दा हैं।।
9)
किसी
की टाँग खींचने के बजाय किसी का हाथ खींचकर उपर लेना बेहतर होता है!
10)
इंसान
से प्रेम करो वस्तु से नही और वस्तु का उपयोग करो इंसान का नही!
सुविचार पढ़ने से मन को शांति भी मिलती है और समस्या का समाधान भी मिलता हैं तथा कुशल कर्म करने की उत्तम उर्जा मिलती हैं इसी लिए आपके लिए लाये हैं 10 सुविचार!
१)
जिंदगी
अपने हिसाब से ही जीनी चाहिए
लोगों
को खुश रखने के चक्कर में तो शेर को भी सर्कस में नाचना पड़ता है
२)
मुझे
क्या??
तुम्हें
क्या??
हमें
क्या??
यही
करते करते,
रिश्ते
ख़त्म हो जाते हैं!!
३)
टेंशन
से चेहरे पर पिम्पल पड़ते हैं,
रोने
से चेहरे पर रिंकल पड़ते हैं,
इसलिए
दोस्त हमेशा हँसते रहो,
क्योकि
हँसने से चेहरे पे डिंपल पड़ते हैं…
४)
मूर्खता
का प्रारंभ स्वयं को बुद्धिमान समझने से होता है!!
५)
उम्र
थका नही सकती
ठोकरे गिरा
नही सकती
अगर
ज़िद
हो जीतने की तो
परिस्थितयां
भी हरा नही सकती
६)
जिंदगी
में अगर बुरे वक्त नही आते तो, अपनो में छुपे गैर, ओर गैरो
में छुपे हुये अपने कभी नजर नही आते।
७)
ज़िन्दगी
में एक ऐसे इंसान का होना बहुत ज़रूरी है
जिसको दिल का हाल बताने के लिए लफ़्ज़ों की जरुरत न पड़े
८)
कुछ
तकलीफ़ें हमारा इम्तिहान लेने नही, बल्कि,
हमारे साथ जुड़े लोगों की पहचान करवाने आती है
९)
शमशान की राख देखकर
मन मे एक ख्याल आया सिर्फ राख होने के लिए इंसान जिंदगी भर दूसरो से कितना जलता
है!
१०)
चेहरे की
हंसी से गम को भुला दो
कम बोलो
पर सब कुछ बता दो
ख़ुद ना
रूठो पर सबको हंसा दो
यही राज
है जिन्दगी का
जियो और
जीना सिखा दो
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