Followers

Saturday, 12 August 2023

आमुक्ति का करिश्मा: करिश्मा: भाग ३

 



कृपया, पूरी कथा पढ़ने के लिए अनुक्रम पर जाए|


किरण ने कहा, “सीमा खुद ऐसी जगह गयी थी, जहा इस पिशाचिनी को मारा गया था|” आगे किरण ने पूछा, “थोडा दिमाग पर जोर देकर, याद कर के, बताओ सीमा उस दिन कहा-कहा गयी थी? कुछ तो बताया होगा उसने?”

उर्मिला ने आसू पोछते हुए, अपनी पीड़ा को संभालते हुए कहा, “वो सीमा के साथ आखरी बार की हुई बात मैं कैसे भूल सकती हु| बहुत खुश दिख रही थी| पुरे दिन भर कहा गयी? क्या किया? सब बता रही थी| बस बेहोश होने के पहले उसने कहा की वो अपनी दोस्त करिश्मा के साथ किसी मजार पर भी गयी थी| पर वहा उसने क्या किया? ये बताने के पहले ही उसकी तबियत बिघड गयी और वो दांत भींचते हुए बेहोश हो गयी|”


लेखिका: रिंकू ताई

कृपया, पूरी कथा पढ़ने के लिए अनुक्रम पर जाए|


आमुक्ति का करिश्मा: करिश्मा: भाग २



कृपया, पूरी कथा पढ़ने के लिए अनुक्रम पर जाए|

 

किरण को देखकर उर्मिला और नागनाथ थोड़े परेशान से हो गए थे| कारण केवल उसका तांत्रिक होना था| और ये दोनों इन बातों पर जरा भी विश्वास नहीं करते थे| पर वो इतने हताश थे की, वो दोनों अब तंत्र मन्त्र का भी सहारा लेने के लिए भी तैयार थे| बस उन्हें उनकी प्यारी बेटी वापस पहले जैसी चाहिए थी|

सीमा को देखते ही उसने कहा, “दीदी आप मानोगी नहीं, पर सीमा पर पिशाचिनी का साया हैं| किसी ऐसी पिशाचिनी का जो पेट से थी तब बड़ी बेरहमी से मारी गयी हो|”

ये सुन उर्मिला ने कहा, “मेरी सीमा ने किसी का क्या बिघाडा हैं, जो उसे किसी पिशाचिनी ने पकड़ लिया हैं?”

किरण बोली, “उस पिशाचिनी की सीमा से कोई दुश्मनी नहीं हैं| वो बस सीमा को माध्यम बना कर कुछ कहने की कोशिश कर रही हैं|”

उर्मिला ने पूछा, “सीमा से दुश्मनी नहीं, तो फिर सीमा को ही क्यों चुना उस पिशाचिनी ने?”


लेखिका: रिंकू ताई

कृपया, पूरी कथा पढ़ने के लिए अनुक्रम पर जाए|

आमुक्ति का करिश्मा: करिश्मा: भाग १



कृपया, पूरी कथा पढ़ने के लिए अनुक्रम पर जाए|

दो दिन बाद सीमा अपने घर पर थी, अपने शहर दुर्ग में थी| सीमा अभी भी मल्यालम में बडबड किये जा रही थी| उसकी हालत देख कर माँ-पिता के ह्रदय की पीड़ा और बढ़ रही थी|

वो बीमार हैं ये सुनकर कई नातेदार मिलने भी आ रहे थे| पर उसकी हालत देखकर उर्मिला और नवनाथ को सांत्वना देकर जा रहे थे|

फिर एक दिन सीमा की दूर की मौसी किरण उससे मिलने आई| किरण को बाकि नातेदारों से सीमा की हालत का पता चल गया था| किरण को तंत्र और ज्योतिष विद्या का ज्ञान था और भुत भगाना, वशीकरण उतारना, इत्यादि काम वो कई सालों से कर रही थी| और इसीलिए वो सीमा को ध्यान से देखने ही आई थी| उर्मिला को वो सिर्फ मदत करना चाहती थी|


लेखिका: रिंकू ताई

कृपया, पूरी कथा पढ़ने के लिए अनुक्रम पर जाए|


आमुक्ति का करिश्मा: पागलपन: भाग ४




 कृपया, पूरी कथा पढ़ने के लिए अनुक्रम पर जाए|


पूरी जांच के बाद सीमा का इलाज शुरू हो गया था| जो भी दवाइयाँ दी जा रही थी उसका असर हो रहा था| उसे शामतक होश भी आ गया था| उसे होश में आते देख उर्मिला को चैन मिला| उसने तुरंत डॉक्टर को बुलाया| डॉक्टर ने आकर देखा और कहा, “पेशंट अब खतरे के बाहर हैं|” ये सुनकर चिंता में दुबे नागनाथ को भी थोड़ी उम्मीद जगी|

पर जो सीमा जागी वो अलग थी| वो घडी में रो रही थी घडी में पीड़ा में चीख रही थी|

वह मल्यालम में बड़बड़ा रही थी, “ഞങ്ങ നിന്നോട് എന്ത് ചെയ്തു. ദൈവത്തെപ്രതി നമുക്ക് പോകാം. എന്നെ കൊല്ലരുത്.”

वो फिर जोर जोर से चिल्लाने लगी, “എന്റെ വയറു കടിക്കരുത്. ഇല്ല! ഇല്ല! ഭസ്ഥ ശിശുക്ക നിങ്ങക്ക് എന്ത് ദോഷമാണ് ചെയ്തത്?

सीमा का ये हाल देखकर उर्मिला घबरा गयी और जोर-जोर से रोने लगी| नागनाथ ने उसे शांत करने की कोशिश की| पर जवान बेटी को ऐसी हालत में देखकर नागनाथ भी कही अन्दर से टूट गया था|

डॉक्टरी सलाह पर साइकोलोजिस्ट को बुलाया गया| पूरी साइकोलॉजिकल जाँच होने के बाद यह बात सामने आई की सीमा पागल हो गयी हैं|

ये सुन उर्मिला ने रोना शुरू कर दिया और जवान बेटी का पागलपन देख कर नागनाथ की तो हिम्मत ही टूट गयी थी| पर थोड़ी देर में उन्होंने अपने आप को संभाला और सीमा को वापस दुर्ग लेकर जाने के फैसला किया|


लेखिका: रिंकू ताई

कृपया, पूरी कथा पढ़ने के लिए अनुक्रम पर जाए|


आमुक्ति का करिश्मा: पागलपन: भाग ३

 


कृपया, पूरी कथा पढ़ने के लिए अनुक्रम पर जाए|

एर्नाद के उस छोटे से अस्पताल के डॉक्टर को कुछ समझ नहीं आ रहा था की सीमा की बेहोशी की वजह क्या हैं? ऑक्सीजन लगा कर, उस डॉक्टर ने तुरंत सीमा को थिरुवनंतपुरम के बड़े अस्पताल में ले जाने की सलाह दी|

जो भी स्थिती थी, करिश्मा को समझ गया था की उससे अकेले से कुछ नहीं होगा| करिश्मा ने उर्मिला से कहा “आंटी यहाँ कुछ समझ नहीं आ रहा की क्या हो रहा हैं? आप जल्द ही यहाँ आ जाइये मैं सीमा को अम्ब्युलेंस में लेकर थिरुवनंतपुरम पोहोचती हु|”

अगली सुबह करिश्मा ने सीमा को थिरुवनंतपुरम के बड़े अस्पताल में भर्ती करा दिया था और सीमा के माता-पिता उर्मिला और नागनाथ भी वहा पोहोच गए थे| करिश्मा ने अस्पताल के सारे कागजात उर्मिला को दिए और वो अपने घर अपनी जॉब का कारण बताकर चली गयी| 

कृपया, पूरी कथा पढ़ने के लिए अनुक्रम पर जाए|

लेखिका: रिंकू ताई



आमुक्ति का करिश्मा: पागलपन: भाग २

 


कृपया, पूरी कथा पढ़ने के लिए अनुक्रम पर जाए|

गाड़ी में बैठने के बाद सीमा ने कहा, “चलो अब लौट चलते हैं, अब थकान महसूस हो रही हैं|”

करिश्मा ने भी हाँ भरी और दोनों अपने होटल पर पोहोची| थोड़ी देर आराम करने के बाद दोनों ने डिनर लिया और फिर सीमा अपनी माँ उर्मिला के साथ बात करने लगी|

उसने बताया की आज उसने क्या-क्या देखा? कहा-कहा गयी? क्या-क्या किया? जैसे ही उसने मजार का जिक्र किया अचानक उसकी सास फूलने लगी, आँखे गोल घुमने लगी, दात भिचने लगे और वो क्या बोल रही हैं ये उर्मिला को कुछ समझ में नहीं आ रहा था| और सीमा बेहोश हो गयी| सीमा को ऐसी हालत में देख करिश्मा ने होटल रिसेप्शन पर मदत मांगी और उसे नजदीकी अस्पताल में लेकर गए|

लेखिका: रिंकू ताई 

कृपया, पूरी कथा पढ़ने के लिए अनुक्रम पर जाए|



आमुक्ति का करिश्मा: पागलपन: भाग १

 


कृपया, पूरी कथा पढ़ने के लिए अनुक्रम पर जाए|


पागलपन

सीमा दुर्ग से तिरुवनंतपुरम, एमबीए पूरा होने के बाद, बैंक में नौकरी करने के लिए गयी हुई थी| नयी जगह, अंजान भाषा, पर सीमा ने नौकरी की खातिर सब अपना लिया| मल्यालम भी सिख रही थी| बैंक में उसकी दोस्ती अन्य कर्मचारियों से भी जल्दी ही हो गयी थी| कई लोग दुसरे राज्यों से वहा आकर काम कर रहे थे और बैंक ने ही सबके रहने के लिए क्वार्टर दे रखे थे|

इतने वर्कलोड के बावजूद भी सीमा हर वीकेंड घुमने जाया करती थी| अबकी बार वो अपनी नयी सहेली करिश्मा के साथ गयी थी| सीमा और करिश्मा एर्नाद घुमने गयी थी| करिश्मा इसके पहले भी एर्नाद कई बार आ चुकी थी| केरला हैं ही इतना सुन्दर की कितना भी घूम लो, देख लो, बार-बार देखने की इच्छा होती हैं|

सीमा हर रोज वैसे तो पूजा करती थी, पर आज सीमा को बस घूमना था और ढेर सारी सेल्फी लेनी थी, बस वो वही कर रही थी| और दूसरी तरफ करिश्मा, नमाज के समय बराबर नमाज अदा कर रही थी|

दोनों घूम रही थी, एक जगह से दूसरी जगह, जैसे मानो फिर कभी नहीं आयेगी| एक जगह करिश्मा ने बिच जंगल कार रोकी और उसे किसी बाबा की मजार दिखी| मजार पर हरे रंग की चादर चढ़ी हुई थी पर चारो और जंगल और अजीब सी शांति थी|

दोनों कार से उतरी, और करिश्मा ने कहा, “सीमा, ये बाबा मोपला विद्रोह में शहीद हुए थे, अंग्रेजो से लड़ते-लड़ते| आओ तुम भी यहाँ दुआ मांग लो|”

करिश्मा ने अपने साथ जरी लगी हुई चादर लायी थी| दोनों ने मिलकर उस मजार पर चादर चढ़ाई| और जैसे करिश्मा दुआ मांगने के लिए कर रही थी वैसा ही सीमा कर रही थी|

कृपया, पूरी कथा पढ़ने के लिए अनुक्रम पर जाए|

लेखिका: रिंकू ताई|



ए आय संग बाते: #काला_कानून_वापस_लो

#काला_कानून_वापस_लो ये क्यों ट्रेंड हो रहा है? @ grok यह हैशटैग हाल के सुप्रीम कोर्ट फैसले के विरोध में...