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Monday, 10 March 2025

पंछी उड जाना

बंदकर खिडकी या बंद कर व्दार, 
कितने हि तू ताले डाल
 एक दिन तोडके पिंजरा, पंछी उड जाना। पंछी उड जाना ...

करले जतन हजार, पंछी उड जाना ॥ धृ ॥

महल धरे के धरे रहेंगे, धन दौलत सब पडे रहेंगे ।

साथ चलेगा कोई न तेरे, दूर दूर सब खडे रहेंगे ।

करले सोच विचार के पंछी उड जाना ।।

ईश्वर की कर भक्ति बंदे, छोड दे सारे पाप के धंदे ।

मोह माया की जाल सुनेरी, सब के सब फासी के फंदे ।

जपले कृष्ण मुरार के पंछी उड जाना ।।

करले कुछ तो नेक कमाई, आखीर तेरे काम ये आयी 
लाख चौरासी जन्म भोगते, मानस देह तूने पायी 
करता क्यु बेजार के पंछी उड जाना ।।

जो वहा जाता

शाम की कोई खबर लाता नहीं, 
जो वहा जाता यहा आता नही ॥धृ ॥

मन मेरा कहता के जोगन मै बनू 
दर बदर मुझसे फिरा जाता नही ।।

जो वहां जाता यहां आता नहीं ।। १ ।।

मन मेरा कहता के पंछी मै बनू, 
पंख बिन मुझसे उडा जाता नही ।

जो वहा जाता यहा आता नही ।।२ ॥

मन मेरा कहता के मै विष वा मरु, 
बिन खता मुझसे मरा जाता नहीं।

जो वहा जाता यहां आता नही ।

मन मेरा कहता के तुमको खत लिखू, 
बिन कलम मुझसे लिखा जाता नहीं।

जो वहा जाता यहां आता नहीं।

क्यो गये हो शाम मुझको छोडके, 
बिन तुम्हारे अब रहा जाता नहीं।

जो वहां जाता यहां आता नहीं।

काया

आपणो कोई नहीं संगी रे कायारे 
काया से कोई नही संगी बिना 
राम रघुनाथ भजन बिना कोई नही संगी ॥धृ ॥

चार जणारे कांधे चढीयों, चढ्यो काठरी घोडी 
जाय जंगलमें डेरा दिना, फुक दीनी जेसी होळी ॥१ ॥

हाड जडे जू लकडी रें, केस जळे जू घास । 
कंचन सरसी देह जळत है, उभा देखे पास ॥२ ॥

माता पत्नी रोये जनम जनम, थारी बहन रोवे दस मास । 
घरका तिरीया तिन दिन रोवे। ओर करे घरवासा ॥३ ॥

कोन है थारी बहन भाणजी, कौन है थारी माता । 
कौन है थारे संग चलेंगो, कौन करेला बाता चार ॥४ ।।

धरती है मेरी बहन, भाणजी, अग्नि है म्हारी माता । 
दियो लियो सब संग चलेंगो । अकल करेगी बाता ॥ ५ ॥

मटीया मे रेवे मटिया बिछावें, मटिया कारे सिराना ।
 कहत कबीर सुनो भई साधो, मटिया में रम जाना ॥६ ॥

Monday, 13 January 2025

माँ शाकम्बरी



माँ शाकम्बरी


जय माँ शाकम्बरी, जय जय देवी,हरियाली भरी, प्रकृति की नेवी।
शाक सब्जियों की, रक्षक तुम हो,धरती को हरी-भरी, करती आप हो।
धुंधकर का वध, किया तुमने,अन्न दिया जग को, सबको खुशियाँ दी।
माघ पूर्णिमा को, आपकी जयंती,भक्तों को देती हो, सुख-शांति सब ही।
प्रकृति की देवी, आपकी महिमा,फूलों की खुशबू, सब में बसी है।
सब्जियों की रानी, आपका नाम,जय जय शाकम्बरी, माँ बन के सम।
हाथ जोड़ कर हम, करते प्रणाम,माँ शाकम्बरी, आपके चरणों में।
दे दो आशीर्वाद, हर दुख हरो,जय जय शाकम्बरी, जग की माता हो।

माँ शाकम्बरी की कहानी


माँ शाकम्बरी की कहानी बहुत ही रोचक और धार्मिक महत्व की है। यह कथा हिंदू धर्म के पुराणों, विशेषकर देवी भागवत पुराण और वामन पुराण में मिलती है। यहाँ है माँ शाकम्बरी की कहानी:


कहानी का सारांश:

एक बार देवताओं और दानवों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। दानवों का राजा धुंधकर ने धरती पर अकाल की स्थिति उत्पन्न कर दी, जिससे पृथ्वी पर सारा हरियाला नष्ट हो गया। फल, फूल, और सब्जियाँ सब धुंधकर के क्रोध से बर्बाद हो गए। लोग भूख से त्रस्त थे।

देवताओं ने माँ दुर्गा से सहायता मांगी। माँ दुर्गा ने अपने एक रूप, शाकम्बरी देवी के रूप में प्रकट होकर धुंधकर का वध किया। शाकम्बरी का अर्थ है "सब्जियों की देवी"। उन्होंने अपने शरीर से हर तरह की सब्जियाँ, फल और फूल निकाले, जिससे पृथ्वी फिर से हरी-भरी हो गई।

माँ शाकम्बरी ने अपनी शक्ति से पृथ्वी को पुनर्जीवित किया और भक्तों को भोजन का उपहार दिया। इस प्रकार, उनका नाम शाकम्बरी पड़ा क्योंकि वे "शाक" (सब्जियों) की रक्षक हैं। वे प्रकृति और पोषण की देवी के रूप में पूजी जाती हैं।

महत्व:

शाकम्बरी जयंती: इस दिन माँ शाकम्बरी की पूजा की जाती है, जो आमतौर पर माघ महीने में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। भक्त उनकी पूजा करते हैं, उपवास रखते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विभिन्न प्रकार के शाक-सब्जियों का भोग लगाते हैं।
पर्यावरण का संरक्षण: यह कथा पर्यावरण के संरक्षण का भी संदेश देती है। माँ शाकम्बरी की पूजा प्रकृति के प्रति सम्मान और हरियाली को बनाए रखने की भावना को प्रोत्साहित करती है।

इस प्रकार, माँ शाकम्बरी की कहानी मानवता के पोषण, प्रकृति के संरक्षण और देवी के अनंत रूपों की शक्ति को दर्शाती है।

केवलज्ञान प्राप्ति की कहानी


भगवान धर्मनाथ, जैन धर्म के पंचम तीर्थंकर, के केवलज्ञान प्राप्ति की कहानी कुछ इस प्रकार है:

भगवान धर्मनाथ ने एक राजकुमार के रूप में जन्म लिया था। उनका जन्म एक समृद्ध और शक्तिशाली राजा के परिवार में हुआ था। नामकरण के समय, उन्हें धर्मनाथ नाम दिया गया क्योंकि उनके जन्म के साथ ही धार्मिकता और ज्ञान की भावना स्पष्ट थी। 

धर्मनाथ का बचपन सुख-सुविधाओं में बीता, लेकिन उनके मन में सदैव ज्ञान की खोज और आध्यात्मिकता की लालसा रहती थी। एक दिन, उन्होंने संसार की अस्थिरता और दुख को देखकर घर-गृहस्थी का त्याग कर दिया और एक साधु के रूप में जीवन जीने का निर्णय लिया। वे जंगलों में चले गए और तपस्या में लीन हो गए।

अपनी कठोर तपस्या के दौरान, धर्मनाथ ने अनेक कष्ट सहे। उन्होंने अपने शरीर और मन को शुद्ध करने के लिए बहुत से व्रत और नियमों का पालन किया। उनकी तपस्या की तीव्रता और शुद्धता ने अंततः उन्हें केवलज्ञान प्राप्त करने की योग्यता दी। 

केवलज्ञान की प्राप्ति का वह दिन आया, जब धर्मनाथ ने मेदी तीर्थ पर तपस्या करते हुए, एक पेड़ के नीचे ध्यान में बैठे, समस्त ज्ञान को प्राप्त किया। इस दिन को 'केवलज्ञान दिवस' के रूप में मनाया जाता है। धर्मनाथ ने अपनी समस्त अज्ञानता को दूर कर दिया और उन्हें संपूर्ण ज्ञान, जो कि ज्ञान की अंतिम सीमा है, प्राप्त हुआ।

इस केवलज्ञान के साथ, भगवान धर्मनाथ ने जीवों को मोक्ष का मार्ग दिखाना शुरू किया। उन्होंने धर्म और अहिंसा के सिद्धांतों को प्रतिपादित किया और अनेक शिष्यों को ज्ञान की दीक्षा दी। उनका ज्ञान प्राप्ति का दिन जैन समुदाय में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, जिसमें उनके जीवन और शिक्षाओं की स्मृति में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

Friday, 22 November 2024

सवेरे उठी काम काम काम….


कभी ना लिया शिव का नाम लिरिक्स


कभी ना लिया शिव का नाम,
सवेरे उठी काम काम काम,
कभी ना लिया हरी नाम,
सवेरे उठी काम काम काम.....

हमरे द्वारे पे मंदिर बना है,
मंदिर बना है मंदिर बना है,
कभी ना किया पूजा पाठ,
सवेरे उठी काम काम काम,
कभी ना लिया शिव का नाम,
सवेरे उठी काम काम काम.....

हमरे द्वारे पे गंगा बह रही,
गंगा बह रही जमुना बह रही,
कभी ना किया स्नान,
सवेरे उठी काम काम काम,
कभी ना लिया शिव का नाम,
सवेरे उठी काम काम काम…..

हमरे द्वारे पे कन्या बहुत है,
कन्या बहुत है कन्या बहुत है,
कभी ना किया कन्या दान,
सवेरे उठी काम काम काम,
कभी ना लिया शिव का नाम,
सवेरे उठी काम काम काम….

हमरे द्वारे पे भिक्षुक खड़ा है,
भिक्षुक खड़ा है भिक्षुक खड़ा है,
कभी ना दिया भिक्षा दान,
सवेरे उठी काम काम काम,
कभी ना लिया शिव का नाम,
सवेरे उठी काम काम काम ….
हमरे घर में माता पिता है,
माता पिता है माता पिता है,
कभी ना किया प्रणाम,
सवेरे उठी काम काम काम,
कभी ना लिया शिव का नाम,
सवेरे उठी काम काम काम….

ए आय संग बाते: #काला_कानून_वापस_लो

#काला_कानून_वापस_लो ये क्यों ट्रेंड हो रहा है? @ grok यह हैशटैग हाल के सुप्रीम कोर्ट फैसले के विरोध में...