दुनियभारके किस्से कहानियाँ इस ब्लॉग पर आपका स्वागत हैं। इस ब्लॉग पर आपको विविध तरीके की कहानियाँ, किस्से, कविताएं तथा गीत पढ़ने मिलेंगे।
Followers
Tuesday, 6 June 2023
फिल्म भक्त विदुर १९२१
भारतीय सिनेमा शुरू से ही कहानियों को बदलकर दिखाता आया है।
1921 में कोहिनूर फिल्म कंपनी ने भक्त विदुर ये फिल्म बनाई। यह फिल्म महाभारत के विदुरजी के जीवन पर आधारित थी।
विदुरजी महान विष्णु भक्त थेl एक अच्छे योद्धा भी थे। तलवारबाजी में वह निपुण थे। कौरव राजसभा का मंत्री पद उन्होंने अच्छे से सुशोभित किया था राजनीति और रणनीति दोनों ही विदुरजी को पता थी। विदुरजी कही से भी अहिंसावादी नही थे।
इस फिल्म में विदुरजी की छवि गांधीजी जैसी बताई गई। उस समय भारत में ब्रिटिश गवर्नमेंट ने इस फिल्म को बैन कर दिया था क्योंकि विदुरजी को मोहनदास गांधी की तरह बताया गया था।
इस फिल्म को कांजी भाई राठौड़ ने निर्देशित किया था और विदुर की मुख्य भूमिका द्वारकादास संपत ने निभाई थी।
अंग्रेजों के जमाने से मतलब पिछले 100 सालों से भी ज्यादा समय से भारतीय सिनेमा महाभारत जैसी पवित्र कथा को भी बदल कर बताती आ रही है तो सोचिए आज तक भारतीय सिनेमा ने कितनी कहानियां बदल कर अपने दर्शकों को भ्रमित किया होगा?
Wednesday, 31 May 2023
निर्जला एकादशी व्रत कथा
निर्जला एकादशी व्रत जेष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है निर्जला एकादशी वर्त साल भर की 24 एकादशी का जो फल होता है उस के बराबर फल निर्जला एकादशी व्रत करने से प्राप्त होता है इसलिए निरजला एकादशी को सूर्य उदय से लेकर द्वादशी सूर्योदय तक कुछ भी अन्न जल नहीं लेना चाहिए और द्वादशी को प्रात काल स्नान पूजन करने के पश्चात भगवान को भोग लगाना चाहिए ब्राह्मणों को तथा शक्ति दान देना चाहिए उसके पश्चात अपने आप प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलना चाहिए जो लोग निर्जला एकादशी के दिन ब्राह्मणों को अन्य जल दक्षिणा वस्त्रों सहित अन्न का दान करते हैं उनको अक्षय फल की प्राप्ति होती है
पांडु पुत्र भीम सेन ने व्यास जी से पूछा हे पितामह …माता कुन्ती भ्राता युधिस्टर ,अर्जुन, नकुल, सहदेव, और द्रौपदी आदि सभी एकादशी का व्रत करते हैं और मुझे भी अनाज खाने को मना करते हैं परंतु मैं उनसे कहता हूं कि भक्तिपूर्वक भगवान की पूजा कर सकता हूं दान कर सकता हूं भक्ति कर सकता हूं परंतु भोजन के बिना नहीं रह सकता हूं
व्यास जी ने कहा …हे पांडु पुत्र भीम सेन यदि तुम नरक और स्वर्ग को अच्छा समझते हो तो प्रत्येक मास की दोनों पक्ष की एकादशी को अन्न मत खाया करो
भीम ने कहा .... मै पहले ही कह चुका हूं कि मैं भोजन के बिना नहीं रह सकता यदि साल भर में कोई एक ही बात हो तो मैं रख सकता हूं मेरे पेट में ब्रिक नाम वाली अग्नि है मैं भोजन के बिना नहीं रह सकता हूँ आप कोई ऐसा व्रत बताइए जो वर्ष भर में केवल एक बार ही करना पड़े और मुझे स्वर्ग की प्राप्ति हो जाए
व्यास जी के आज्ञा अनुसार भीमसेन ने निर्जला एकादशी का व्रत किया तथा इस एकादशी को भीमसेन या पांडव एकादशी भी कहा जाता है निर्जला व्रत करने वाले प्रातः काल भगवान विष्णु का पूजन करके प्राथना करें हे भगवान आज मै श्रद्धा पूर्वक निर्जला व्रत रखकर दूसरे दिन भोजन करूंगा आपकी कृपा से मेरे सब पाप नष्ट हो जाए इस दिन जल से भरा हुआ बर्तन वस्त्र स्वर्णा दक्षिण ब्राह्मणों को दान करनी चाहिए जो मनुष्य इस ब्रत को करते हैं उनको करोड़ों करोड़ों तीर्थों की यात्रा का संगम गंगा के किनारे स्नान करने से सूर्य ग्रहण चंद्र ग्रहण में कुरुक्षेत्र में सोने चांदी हाथी घोडा दान करने से जो फल मिलता है वह फल निर्जला एकादशी के व्रत से प्राप्त हो जाता है जिन्होंने निर्जला एकादशी का व्रत किया वे लोग ब्रत के प्रभाव से स्वर्ग जाते हैं
हे भीमसेन ..जो पुरुष या स्त्री श्रद्धा पूर्वक इस ब्रत को करते हैं उनके निम्नलिखित कर्म करने चाहिए प्रथम भगवान का पूजन फिर गोदान ब्राह्मणों को मिष्ठान दक्षिणा देनी चाहिए तथा जल से भरे कलश का दान अवश्य करना चाहिए निर्जला के दिन अन्न वस्त्र उपाहन अनाज का दान करना चाहिए । जो मनुष्य भक्तिपूर्वक कथा को पढ़ते हैं या ब्राह्मणों के मुख्य से सुनता हैं उनको निश्चय ही स्वर्ग की प्राप्ति होती है बोलो एकादशी महत्यम्य् की जय
=============================
Monday, 8 May 2023
क्या भारतीय सिनेमा या बॉलीवुड की हर फिल्म आपको केवल सच बताती आई हैं?
द केरला स्टोरी यह फिल्म हाल ही में रिलीज हुई हैं और चर्चा का विषय बन चुकी हैं| कुछ फिल्म क्रिटिक्स जो असल में पेड रिव्यु देते हैं उनके हिसाब से ये एक प्रोपगंडा फिल्म हैं| इस फिल्म की कहानी को झूठा साबित करने की पूरी कोशिश की जा रही हैं और कोर्ट केस भी हो गयी हैं|
पर क्या भारतीय सिनेमा या बॉलीवुड की हर फिल्म आपको केवल सच बताती आई हैं?
नहीं भारत की कोई भी कमर्शियल मसाला फिल्म आपको कोई सत्य बताती नहीं हैं| ये १९४० के दशक से केवल भारत की संस्कृति और बहुसंख्यांक हिन्दू समाज को बदनाम और भ्रमित करने के लिए बनायीं गयी हैं| और आप ये ब्रेनवाशिंग आपकी ही कमाई के पैसों से देखते हो आपका अपना कीमती समय देकर|
आपको शायद ये बात गलत लगे पर भारतीय सिनेमा का इतिहास रहा हैं की तत्थ्यों को मोड़कर आपके सामने प्रस्तुत किया जाए और आपके विचारों को देश और धर्म के विरुद्ध भड़काया जाए या हिन्दू होने के नाते आपको शर्मिंदा किया जाए|
श्री ४२० में राज कपूर अपनी प्रेमिका को दिवाली के दिन छोड़कर जुआ खेलने लगता हैं| इस सुपरहिट फिल्म ने दिवाली का स्वरुप विकृत कर दिया| पहले तो यह ट्रेंड सेट हो गया की दिवाली जुआ खेलने का (जो की लक्ष्मीजी का अपमान हैं) का मौका हैं और लोग मॉडर्न बनने के नाम पर लक्ष्मी पूजन के जगह जुए को ज्यादा महत्त्व देने लगे| ऐसा कोई धर्म धरती पर नहीं हैं जो ये कहे की त्यौहार के दिन जुआ खेलो और गरीब हो जाओ पर बॉलीवुड आपको ये झूठ दशकों से परोसता आया हैं और आप आपका समय बर्बाद कर इस झूठ को स्वीकार किये जा रहे हो|
बॉलीवुड का बड़ा फेमस विलेन हैं तेजा जो दिवाली के दिन विजय (अमिताभ बच्चन) के माँ बाप को दिवाली के पटाखों के आवाज का सहारा लेकर मार देता हैं| कुछ ऐसे ही होली के दिन गब्बर (फिर से अमिताभ बच्चन की शोले फिल्म) खून की होली खेलने के लिए गाव में आता हैं| कुछ ऐसे ही होली के दिन किसी दामिनी के घर बलात्कार की घटना होती हैं जो बड़ी भयानकता के साथ दिखाई गयी| ऐसा कोई त्यौहार बॉलीवुड ने नहीं छोड़ा जिसका स्वरुप बदले की भावना से ना जोड़ा गया हो| अमिताभ बच्चन इसमें एक्सपर्ट हैं| ये कलाकार नवरात्रि में माता के ही मंदिर में खून खराबा करता हैं| एंग्री यंग अमिताभ की कई फिल्मे हैं जिसमे हिन्दू त्यौहार पर खून खराबा किया गया हैं और ये अब ट्रेंड बन गया हैं जो फिल्मों तक सिमित नहीं बल्कि टीवी सेर्तिअल्स और सोशल मीडिया के स्केच वीडियोज में भी हैं| ये ट्रेंड इसीलिए बन गया हैं क्यों की हमने इस तरह के दृश्यों पर कोई आपत्ति नहीं जताई|
महाशिवरात्रि पर एक गाना बड़ी जोरशोर से हिन्दू लगते हैं और वो हैं राजेश खन्ना का जय जय शिवशंकर| इस गाने में हिन्दू साधू वेश में राजेश खन्ना के समेत कई कलाकार शिव आराधना के नाम पर भांग का नशा कर अश्लील हरकते करते हैं| और इन अश्लील नशेडी हरकतों के पर हमने ही कोई आपत्ति नहीं जताई और ये गाना रातोरात लोकप्रिय हो गया और आज भी नयी पीढ़ी इसे बड़े चाव से सुनती और देखती हैं| पर ये अश्लीलता होली के गीतों में भी हैं|
होली का पर्व प्रकृति के रंगों से प्रकृति को धन्यवाद देने का पर्व हैं और राधा कृष्ण की आराधना इसका अभिन्न अंग हैं| बागवान फिल्म का “होली खेले रघुवीर अवध में” यही गीत ले लीजिये| बड़े जोर शोर से इस गीत पर होली पार्टी में हिन्दू ठुमके लगाते हैं| गाने का अर्थ निकालता हैं, ‘आप पुरुष हैं और आपको होली पर मौका मिलता हैं की आप हर महिला को अपने हिसाब से शरीर पर कही भी रंग लगादो इसमें शर्माने की कोई बात नहीं हैं|’ और ऐसे ही हर गीत को अश्लीलता से हर होली पर रिलीज़ किया गया और हिन्दू समाज ने ही ऐसे अश्लील गानों को लोकप्रिय बनाया|
बात केवल आपके त्योहारों की ही नहीं आपके मंदिरों की भी हैं| गर्मियों में लोग श्रीनगर, कश्मीर घुमने जाते हैं तो उन्हें सिलसिला फिल्म के “देखा एक ख्वाब” गाने में बताया गया तुलिप गार्डन देखना हैं पर शंकराचार्य मंदिर नहीं जाना हैं| शंकराचार्य मंदिर नहीं जाने का कारन भी बॉलीवुड की फिल्म मिशन कश्मीर में हैं जिसमे शंकराचार्य मंदिर को आतंकवादियों का अड्डा बताया गया|
ये सारा भ्रम भारतीय संस्कृति को निचा दिखाकर भोले भले मासूम समाज का ब्रेनवाशिंग करने के लिए ही बॉलीवुड कई दशकों से किये जा रहा हैं| इसका असर ये होता हैं की लोग तिलक जनेवु छोड़कर चादर और फादर के झांसे में आये| भोली लड़कियों का ब्रेनवाशिंग इन्ही फ़िल्मी सीन्स को बताकर पहले शुरू किया जाता हैं और बाद में उनके साथ जो होता हैं वो द केरला स्टोरी में बताया गया हैं|
आपका कीमती समय, आपकी मेहनत की कमी दोनों आपने इस ब्रेनवाशिंग पर मनोरंजन के नाम पर बर्बाद करना या दोनों का सदुपयोग कर अपने धर्मग्रंथों में लिखी गाथाये पढ़कर स्वयं का तथा अपने बालक बालिकाओं का चरित्र निर्माण करना यह आपका निर्णय हैं| इस लेख का काम आपको सिक्के की दूसरी साइड दिखाना हैं|
मेरे बचपन में मेरी माताजी ने मुझे ये कहा था, “फिल्मों में जो बताते हैं उनमे पाच प्रतिशत सत्य होता हैं|” मैंने सुना क्युकी माताजी की बात में प्रभाव था| आज के बालक इस बात को बोलकर नहीं सुनेंगे| वे इस बात को माने इसके लिए उन्हें पहले अपने व्यवहार में गलत को न देखने की बात लानी पड़ेगी तभी उनकी बात का प्रभाव होगा|
यहाँ तक पढ़ने के लिए धन्यवाद!
जय जय श्री राम!
© रिंकू ताई!
Thursday, 13 April 2023
विकट संकष्टी चतुर्थी
जय श्री गणेश मेरे मित्रों और सखियों। आज विकट संकष्टी चतुर्थी के बारेमे लिख रही हूं।
विकट संकष्टी चतुर्थी
विकट संकष्टी चतुर्थी मतलब वैशाख चतुर्थी याने वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी। मान्यता है की इस दिन गणेशजी की पूजा तथा चतुर्थी व्रत करने से संतान प्राप्ति होती है। इस चतुर्थी को संकट हरने वाली चतुर्थी भी कहते है। यह हिंदू वर्ष की पहली बड़ी चतुर्थी है।
चतुर्थी माता की पूजा
चौथ माता या चतुर्थी माता गौरी का ही एक रूप है। गौरी ने ही गणेशजी को जन्म दिया है। चतुर्थी के दिन माता का पूजन करना चाहिए। देवीभागवत के अनुसार देवी पार्वती और शिव ही सारी सृष्टि के निर्माणकर्ता है - दोनों प्रकृति और पुरुष है। प्रकृति के प्रति मन में हमेशा कृतज्ञता का भाव रहना चाहिए - आप प्रेमसे हर बात के लिए प्रकृति को धन्यवाद देंगे तो वह आपको आपके संकल्प पूर्ण करने की शक्ति देंगी।
चौथ माता की प्रतिमा आपके पास है तो आप उसी प्रतिमा को स्थापित कर उसकी पूजा कर सकते है। और अगर आपके पास माता की प्रतिमा नहीं है तो कोई बात नहीं आप सुपारी को माता की जगह स्थापित कर विधिवत उसी सुपारी की पूजा कर सकते है और माता जी को वस्त्र (कमसे कम ब्लाउज पीस) चढ़ा सकते है। अगले दिन किसी गरीब स्त्री को वही वस्त्र दान दे सकते है।
गणेश पूजन
गणेशजी बुद्धि के देवता है तो उनका सम्बन्ध मानव के विचारों से आता है। गणेशजी की पूजा तथा गणेश मंत्रों का जाप करने से विचारों में शुद्धता आती है और उसका प्रभाव जीवन पर सभी तरह से भला ही होता है।
तीन प्रकार के कर्म होते है - अ) वैचारिक कर्म - सरल भाषा में सोचना, ब) वाणी कर्म - बोलना और क) शारीरिक कर्म - शरीर से किया जाने वाला कर्म। जब तक आप सोचते नहीं तबतक आप शरीर या वाणी से कोईभी कर्म नहीं कर सकते है। इसीलिए आपके विचार शुद्ध रहना जरुरी है। शुद्ध विचार से ही कुशल कर्म संभव है। और अगर कर्म अच्छे है तो परिणाम भी अच्छे रहेंगे।
उसके बाद गणपति अथर्वशीर्ष या गणेश स्तोत्र का कमसे कम २१ बार पठन करें। गणपति मंत्र की माला भी आप चाहे तो फेर सकते है।
चन्द्र दर्शन एवं चन्द्र पूजन
चतुर्थी के दिन चन्द्र उदय के बाद चन्द्रमा दर्शन कर उन्हें अर्घ्य अर्पित कर पूजन करते है। यह पूजन इसलिए है क्यों की -
१) मनुष्य शरीर में ७०% पानी होता है और चन्द्रमा का खगोलीय असर पानी पर होता है - इसका मतलब हमारे शरीर पर भी उसका असर उतने ही अनुपात में होता है जितने अनुपात में सागर पर होता है। कुछ विशिष्ट तिथियों पर चंद्र का दर्शन करने से मतलब क्षण चंद्रप्रकाश में बिताने से हमारे शरीर पर उसका अच्छा असर होता है इसीलिए उन खास तिथियों पर कोई न कोई व्रत या त्यौहार सनातन धर्म सस्कृति में मनाया जाता है।
२) मनुष्य का मन जल समान है - शान्त हुआ की साफ़ होना शुरू हो जाता है। और इसीलिए मन का स्वामी चन्द्र ऐसा ज्योतिषशास्त्र का मत है। इसीलिए चंद्र का दर्शन करने की परम्परा सदियों से चली आ रही है।
३) चन्द्र का प्रभाव सभी जीवित वस्तुओ पर होता है - वनस्पतियो पर भी होता है। की वनस्पतिया औषधीय होती है उनकी शुद्धि जरुरी है इसीलिए चन्द्र को अर्घ्य प्रदान करते समय मनमे वनस्पतियों की शुद्धि की प्रार्थना अवश्य करे।
भारतीय परम्पराओं में मन के मालिक बनने के हिसाब से ही पूजन विधिया है। और अध्यात्म केवल मन को स्वच्छ करने के लिए है। गणेशजी और चन्द्र के पूजन से मन और विचार दोनों की शुद्धि होती है इसीलिए चतुर्थी के दिन चतुर्थी माता के साथ उनका भी पूजन किया जाता है।
संतान प्राप्ति और सौभाग्य प्राप्ति
संतान प्राप्ति का और चतुर्थी पूजन का सम्बन्ध क्या है? यह प्रश्न मनमे आता है। उसका एक उत्तर यह है की चन्द्रमा का एक माह की एक पूरी साइकिल है - पूर्णिमा से अगली पूर्णिमा तक का एक महीने का समय है। और महिलाओ की महावारी का समय भी उतना ही है। चन्द्र पूजन से गर्भ धारणा की सम्भावनाये बढ़ जाती है इसीलिए चन्द्र दर्शन और पूजन आवश्यक है। संतान प्राप्ति के लिए चतुर्थी का व्रत पति और पत्नी दोनों को करना चाहिए तभी अच्छी संतान की प्राप्ति होंगी।
अगर आपके विचार शुद्ध है तो कर्म कुशल रहेंगे और उनसे सारी बाधाएं दूर हो जाएँगी और आपका सौभाग्य जागेगा इसीलिए चतुर्थी व्रत से सारे संकट दूर हो कर व्रत करने वाले पुरुष और स्त्री दोनों को सौभाग्य प्राप्त होता है।
माता, गणेशजी और चन्द्रमा का पूजन चतुर्थी के दिन करते है। अगर आप पूजन पूर्व मन को शांत करके धन्यवाद करते है और मन ही मन देवताओ से जाने अन्जाने बुरे कर्मो की क्षमा याचना करके फिर आपके संकल्प को पूर्ण करने की प्रार्थना करते हो तो आपका व्रत अवश्य पूरा होगा और फलदायी होगा।
अंततक पढ़ने के लिए धन्यवाद। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। और निचे कमेंट बॉक्स में एक बार माता का जयकारा लगा दीजिये।
Monday, 10 April 2023
तीसरी आंख
Sunday, 9 April 2023
ए. के. हंगल
जय श्री राम काफिरों!
हा आपको काफ़िर कह कर संबोधित किया हैं मैंने| आप भारतीय सिनेमा के लिए एक काफिर ही तो हैं| और "सिनेमा और समाज" इस लेख श्रृखला में आपको काफिर ही कहूँगी|
नमस्ते मैं हु रिंकू ताई और आपका स्वागत हैं मेरे इस ब्लॉग पर!
मेरा यह ब्लॉग ए के हंगल के नाम हैं|
ए के हंगल पूरा नाम अवतार किशन हंगल, जन्म से कश्मीरी पंडित हैं और इनका जन्म सियालकोट में १ फरवरी १९१४ को हुआ था| सियालकोट अब पाकिस्तान में हैं तब ब्रिटिश राज के समय पंजाब प्रोविएंस में था| कश्मीरी पंडित रहने के बावजूद भी ए के हंगल शुरूआती दिनों में दर्जी का काम किया करते थे| मतलब ऐसा कभी जरुरी नहीं था की अगर आप पंडित हैं तो केवल पूजा पाठ ही कर सकते हैं - भारतीय समाज में व्यक्ति शुरू से ही अपनी रूचि के हिसाब से अपना व्यवसाय चुन सकते थे|
ए के हंगल का बचपन और जवानी पेशावर में ही ज्यादा गुजरा| इन दिनों ये थिएटर आर्टिस्ट के रूप में भी कई रोल कर चुके थे| और कई सालों तक कई नाटक उन्होंने किये| १९४७ में बटवारे के समय उन्होंने पाकिस्तान में रहना स्वीकार किया था, परन्तु उनकी कम्युनिस्ट विचारधारा के चलते उन्हें पाकिस्तान सरकार ने जेल में बंदी बना लिया था| १९४९ में रिहा होने के बाद वे मुंबई आये और यहाँ पर दर्जी का काम करने लगे| समय मिलने पर नाटक भी किया करते थे| फिर १९६६ में इन्हें राज कपूर की फिल्म तीसरी कसम में पहली बार उम्र के ५५ बिट जाने के बाद काम मिला| १९१२ तक फिल्मों में कई छोटे मोटे रोल करने के बाद उन्होंने कृष्ण और कंस नामक फिल्म में उग्रसेन का रोल तथा मधुबाला एक इश्क एक जूनून इस सीरियल में स्पेशल अपीयरेंस किया और उसके बाद २६ अगस्त १९१२ में उम्र के ९८ वे साल में गुजर गए| ये कलाकार अपनी उम्र के आखरी समय तक काम करता रहा|
कई आर्टिकल्स आपको मिल जायेंगे जो कहेंगे की ए के हंगल एक स्वतंत्रता सेनानी हैं| कोई ब्रिटिश राज के समय पेशावर या कराची से ताल्लुक रखने वाला इंसान हमेशा ही स्वतंत्रता सेनानी हो ये जरुरी नहीं हैं| अगर वो स्वतंत्रता सेनानी थे तो किस क्रन्तिकारी की विचारधारा से प्रभावित थे ये भी जानना जरुरी हैं| पर इसके प्रमाण कही नहीं लिखे गए हैं| अगर आपको पता हो तो कमेंट कर जरुर बताइए| कई जगहों पर ये भी लिखा मिलेगा की कमला नेहरु उनकी दूर की मौसी हैं| केवल कश्मीरी पंडित रहने से कोई नेहरु परिवार का रिश्तेदार नहीं होता| यही हैं बॉलीवुड की गन्दगी|
जब ए के हंगल पेशावर में थे तब वो श्री संगीत प्रिय मंडल यह नाटक ग्रुप के सदस्य थे| कराची में उन्हें अपनी कम्युनिस्ट विचारधारा के चलते तिन साल की सजा हुई थी उसके बाद वो मुंबई चले आये| मुंबई में वो बलराज साहनी और कैफ़ी आज़मी जैसे मार्क्सवादी नाटककारो से जुड़ गए| और इंडियन पीपल्स थिएटर एसोसिएशन के मेम्बर बन गए| कई नाटको में उन्होंने लीड रोल किया, और ज्यादातर नाटक कम्युनिस्ट और मार्क्सिस्ट विचारधारा के थे|
ए के हंगल ने २०० से अधिक फिल्मों में अलग अलग भूमिकाये की| उनके इसी योगदान के लिए २००६ में भारतीय सरकार ने उन्हें पद्म भूषण पुरस्कार दिया था| इसके बावजूद ए के हंगल की जिंदगी बदहाली में गुजरी| राज ठाकरे ने अपनी पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की मदत से ए के हंगल की मेडिकल ट्रीटमेंट में मदत की थी| बाकी इस कलाकार को तो बॉलीवुड ने जैसे भुला ही दिया था| अब ऐसा क्यों हुआ? बॉलीवुड की परंपरा इसका कारण हैं या और कोई वजह ये आप ही बता सकते हैं|
यहाँ तक पढ़ने के लिए धन्यवाद!
ये ब्लॉग लिखने के
लिए मुझे काफी मेहनत करनी पड़ती हैं| अगर आपको ब्लॉग अच्छा लगा हो तो कृपया इसे
ज्यादा से ज्यादा शेयर करे| आपकी राय निचे कमेंट करिए| हो सके तो इस ब्लॉग को फॉलो
कर लीजिये| इससे एक प्रेरणा बनी रहती हैं की कोई मेरी बात शांति से पढ़ कर समझ रहा
हैं| आपका एक शेयर और एक कमेंट ब्लॉग की इंगेजमेंट बढाकर इसे ज्यादा से ज्यादा
लोगो तक पोहोचाता हैं|
जय माता दी!
Saturday, 8 April 2023
Indian Cinema GK Part 1
ए आय संग बाते: #काला_कानून_वापस_लो
#काला_कानून_वापस_लो ये क्यों ट्रेंड हो रहा है? @ grok यह हैशटैग हाल के सुप्रीम कोर्ट फैसले के विरोध में...
-
6 servings 250 grams moth beans duly sprouted 2 tbsp ghee clarified butter 2 small onions finely chopped 4 medium tomatoes, blanch...
-
Bharat Mata ki Jay! Moral and motivation both are required for a successful life. Motivation gives you energy to work ahead for your goal ...
-
Bharat Mata Ki Jay! As you know this blog is dedicated to studying only, you all once or more face some depressive situations, and I am here...